Dr. C S Changeriya Dr. C S Changeriya Author
Title: बसंत पंचमी पर खिल उठा चित्तौड़गढ़ का गायत्री शक्तिपीठ: एक दिव्य और मनमोहक नज़ारा
Author: Dr. C S Changeriya
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रंग, उमंग और नई ऊर्जा का प्रतीक 'बसंत पंचमी' का पर्व पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन इस वर्ष चित्तौड़गढ़ (राजस्...

रंग, उमंग और नई ऊर्जा का प्रतीक 'बसंत पंचमी' का पर्व पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन इस वर्ष चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) स्थित गायत्री शक्तिपीठ में इस अवसर पर जो भव्यता देखने को मिली, वह अपने आप में अद्वितीय थी। मंदिर परिसर की अलौकिक सजावट ने हर श्रद्धालु का मन मोह लिया।

पीत वर्ण और फूलों की सुगंधित सजावट

जैसा कि हम तस्वीरों में देख सकते हैं, बसंत पंचमी के अवसर पर पूरे शक्तिपीठ को 'बसंती' (पीले) और नारंगी रंग की थीम में सजाया गया था। मुख्य प्रवेश द्वार (तोरण द्वार), जिस पर "मनुष्य में देवत्व का उदय, धरती पर स्वर्ग का अवतरण" का संकल्प लिखा है, उसे बड़े-बड़े कृत्रिम फूलों के गुलदस्तों और गेंदे की मालाओं से भव्य रूप दिया गया।

मंदिर के अंदर, 'प्रखर प्रज्ञा' और 'सजल श्रद्धा' (जो पूज्य गुरुदेव और वंदनीय माताजी के प्रतीक हैं) के श्वेत संगमरमर के स्मारकों को नारंगी और पीले गेंदे के फूलों की लड़ियों से बहुत ही कलात्मक ढंग से सजाया गया था। गुलाबी और सफेद फूलों के गुच्छे इस श्वेत और पीली सजावट में चार चांद लगा रहे थे।

आध्यात्मिक वातावरण

सजावट की सादगी और भव्यता का अद्भुत संगम यहाँ देखने को मिला। महादेव मंदिर के द्वार और यज्ञशाला के खंभों पर लिपटी गेंदे की मालाएं भारतीय संस्कृति की परंपरा को दर्शा रही थीं। यज्ञशाला में पीले वस्त्र धारण किए साधकों की उपस्थिति और फूलों की महक ने वातावरण को पूरी तरह से आध्यात्मिक और सकारात्मक बना दिया था।

निष्कर्ष

गायत्री शक्तिपीठ, चित्तौड़गढ़ की यह सजावट न केवल आँखों को सुकून देने वाली थी, बल्कि मन को भी असीम शांति प्रदान कर रही थी। बसंत पंचमी पर माँ गायत्री और गुरुसत्ता के चरणों में यह पुष्पांजलि वास्तव में सराहनीय थी। यदि आप चित्तौड़गढ़ में हैं, तो शांति और सौंदर्य के इस केंद्र में एक बार जरूर आएं।

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