चित्तौड़गढ़, 1 फरवरी:
स्थानीय गायत्री शक्तिपीठ में आज रविवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार का भव्य 'शपथ ग्रहण एवं दायित्व विस्तार समारोह' अपार उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में पीत-वस्त्रधारी परिजनों की भारी उपस्थिति और 'माताजी-गुरुदेव' के जयकारों ने पूरे वातावरण को गुंजायमान कर दिया। इस अवसर पर संगठन को नई गति देने के लिए ट्रस्ट मंडल के नए स्वरूप की घोषणा की गई और शांतिकुंज हरिद्वार से आए वरिष्ठ प्रतिनिधियों का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
वरिष्ठ मार्गदर्शकों का पाथेय एवं ट्रस्ट संचालन के सूत्र
समारोह के बौद्धिक सत्र में शांतिकुंज और जोनल स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे:
* मुख्य उद्बोधन: राजस्थान प्रभारी श्री ओम प्रकाश जी अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में संगठन की मजबूती और वैचारिक क्रांति पर जोर दिया।
* ट्रस्ट संचालन मंत्र: कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और शांतिकुंज प्रतिनिधि (राजस्थान कार्यक्रम प्रभारी) श्री घनश्याम जी पालीवाल रहे। उन्होंने नवनिर्वाचित ट्रस्ट मंडल को ट्रस्ट के कुशल संचालन के लिए महत्वपूर्ण सूत्र दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि "आपसी समन्वय, पारदर्शिता और निस्वार्थ सेवा ही गायत्री परिवार की असली शक्ति है," जिसके माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
* उपजोन प्रभारी का संबोधन: पुष्कर उपजोन प्रभारी श्री श्याम सुंदर जी सैन ने भी उपस्थित परिजनों को संबोधित करते हुए अपने विचार साझा किए और कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन किया।
नए ट्रस्ट मंडल की घोषणा
समारोह का मुख्य आकर्षण ट्रस्ट मंडल का विस्तार रहा। मुख्य ट्रस्टी श्री देवीलाल प्रजापति के नेतृत्व में नई टीम ने दायित्व संभाला। ट्रस्ट के नए स्वरूप में निम्नलिखित सदस्यों की घोषणा की गई:
* मुख्य ट्रस्टी: श्री देवीलाल प्रजापति
* सहायक ट्रस्टी: श्रीमती किरण यादव
* ट्रस्टी गण: श्री तुलसीराम धाकड़, श्रीमती गायत्री धाकड़, श्री बाबू लाल माली, श्रीमती प्रभा पालीवाल, श्री अशोक कुमार जैन।
समितियों और प्रकोष्ठों का गठन
संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं:
* जिला समन्वय समिति: श्रीमती किरण यादव ने मंच से जिला समन्वय समिति के सदस्यों के नामों की घोषणा की।
* विभिन्न प्रकोष्ठ: मुख्य प्रबंधक श्री देवीलाल प्रजापति ने कार्य विभाजन करते हुए देवालय एवं आश्रम प्रबंधन, विधि एवं प्रबंधन, संगठन प्रबंधन और आंदोलन प्रबंधन (मातृशक्ति टीम) जैसी समितियों का गठन किया।
नवनियुक्त सभी दायित्वधारियों का स्वागत गुरु आशीर्वचन और भव्य पुष्पवर्षा के साथ किया गया, जिसने माहौल को भावविभोर कर दिया।
भामाशाहों और साहित्य सेविओं का सम्मान
समारोह में समाज और संगठन के लिए समर्पित व्यक्तित्वों का विशेष सम्मान किया गया:
* भामाशाह सम्मान: शक्तिपीठ के विकास में उदारतापूर्वक सहयोग देने के लिए श्री पन्नालाल जी पँवार का 'भामाशाह' के रूप में आत्मीय सम्मान किया गया।
* साहित्य विस्तार सम्मान: युग साहित्य को जन-जन तक पहुँचाने में अद्भुत योगदान देने वाले श्री दीपक जी शर्मा का सपरिवार सम्मान किया गया। श्री शर्मा प्रतिमाह लगभग ₹1 लाख मूल्य का साहित्य पूरे विश्व में निर्यात कर रहे हैं, जो एक अनुकरणीय पहल है।
युवा शक्ति का नया उद्घोष
कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी ने एक नई ऊर्जा का संचार किया। श्री नवीन माली और श्री शरद निगम ने अपनी सक्रियता और समर्पण से यह सिद्ध कर दिया कि वे शक्तिपीठ की उभरती हुई शक्ति हैं। इन युवाओं ने संगठन में नया जोश (नया घोष) भरने का संकल्प लिया और अपनी कार्यक्षमता का परिचय दिया।
सावित्री साधना पर विशेष सत्र
कार्यक्रम के अंतिम चरण में श्री हेमंत चतुर्वेदी का विशेष और ज्ञानवर्धक सत्र रहा। उन्होंने उपस्थित साधकों को 'सावित्री साधना' के गूढ़ रहस्यों, इसकी विधि और जीवन में इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। उनके उद्बोधन ने उपस्थित परिजनों को साधना के प्रति नई दृष्टि प्रदान की।
समारोह का सफल संचालन श्री तुलसीराम जी धाकड़ ने किया। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ और महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ।
जारीकर्ता:
गायत्री शक्तिपीठ, चित्तौड़गढ़





















